चौरासी लाख योनियों - 8400000
पशव:, चतुर लक्षाणी मानव:।।” अर्थात, जलचर जीव: 9 लाख वृक्ष-पौधे : 20 लाख कीट (क्षुद्रजीव): 11 लाख पक्षी: 10 दस लाख पशु: 30 लाख देवता-दैत्य-दानव-मनुष्य आदि : ४००००० (चार लाख) इस प्रकार 9००००० + 2०००००० + 11 ००००० + 1०००००० + 3०००००० + 4००००० = कुल योनियां 84००००० योनियाँ होती है। 84 लाख योनियों को आचार्यों द्वारा 2 भागों में बांटा गया है। इसमें से पहला (१) योनिज तथा दूसरा (२) आयोनिज है मतलब 2 जीवों के संयोग से उत्पन्न प्राणी को ‘योनिज’ कहा जाता है। और जो अपने आप ही अमीबा की तरह विकसित होते हैं। उन्हें ‘आयोनिज’ कहा जाता है। इसके अलावा मूल रूप से प्राणियों को 3 भागों में बांटा जाता है, जो नीचे दिए गए हैं 🔸 जलचर :- जल में रहने वाले सारे प्राणी। 🔸 थलचर :- पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणी। 🔸 नभचर :- आकाश में विहार करने वाले सारे प्राणी। 84 लाख योनियों को नीचे दिए गए 4 वर्गों में बांटा जाता है। १- जरायुज :- माता के गर्भ से जन्म लेने वाले मनुष्य, पशु को जरायुज कहा जाता है । २- अंडज :- अंडों से उत्पन्न होने वाले प्राणी को अंडज कहा जाता है ३- स्वदेज :- मल-मूत्र, पसीने आदि ...