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Showing posts from August, 2024

कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रम्

कालभैरवाष्टकम्  स्तोत्रम् ॐ देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥१॥ अनुवाद: देवराज इंद्र जिनके पवित्र चरणों की सदैव सेवा करते है, जिन्होंने चंद्रमा को अपने शिरोभूषण के रूप में धारण किया है, जिन्होंने सर्पो का यज्ञोपवीत अपने शरीर पर धारण किया है, नारद सहित बड़े बड़े योगीवृन्द जिनको वंदन करते है, ऐसे काशीपुरी के स्वामी का मैं भजन (आराधना) करता हूँ. भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् । कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥२॥ अनुवाद: जो करोड़ो सूर्यो के समान तेजस्वी है,संसार रूपी समुद्र को तारने में जो सहायक हैं, जिनका कंठ नीला है, जिनके तीन लोचन है, और जो सभी ईप्सित अपने भक्तों को प्रदान करते है, जो काल के भी काल (महाकाल) है, जिनके नयन कमल की तरह सुंदर है, तथा त्रिशूल और रुद्राक्ष को जिन्होंने धारण किया है, ऐसे काशीपुरी के स्वामी का मैं भजन (आराधना) करता हूँ. शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् । भीमविक्रमं प्रभुं वि...

Shri Narasimha Rinmochak Stotra

  श्री नरसिंह ऋणमोचन स्तोत्र ॐ देवानां कार्यसिध्यर्थं सभास्तम्भसमुद्भवम् । श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ १॥ लक्ष्म्यालिङ्गितवामाङ्गं भक्तानामभयप्रदम् । श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ २॥ प्रह्लादवरदं श्रीशं दैतेश्वरविदारणम् । श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ३॥ स्मरणात्सर्वपापघ्नं कद्रुजं विषनाशनम् । श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ४॥    अन्त्रमालाधरं शङ्खचक्राब्जायुधधारिणम् । श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ५॥ ॥ श्रीनृसिंहपुराणे ऋणमोचनस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ सिंहनादेन महता दिग्दन्तिभयदायकम् । श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ६॥ कोटिसूर्यप्रतीकाशमभिचारिकनाशनम् । श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ७॥ वेदान्तवेद्यं यज्ञेशं ब्रह्मरुद्रादिसंस्तुतम् । श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॐ ॥ ८॥ इदं यो पठते नित्यं ऋणमोचकसंज्ञकम् । अनृणीजायते सद्यो धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ॥ ९॥ ॥ श्रीनृसिंहपुराणे ऋणमोचनस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

अमावस्या और रवि पुष्य योग

🔴Astrology & Remedies🔴 अमावस्या और रवि पुष्य योग  कल- 04-अगस्त-2024 सिंहो यथा सर्व चतुष्पदानां, तथैव पुष्यो बलवानुडुनां । चन्द्रे विरुद्धोSस्यथ गोवरेSपी सिद्धयंति कार्याणि कर्तानि पुष्ये।। अर्थात: जैसे सिंह चौपायों में बलवान होता है ऐसे ही नक्षत्रो में पुष्य नक्षत्र बलवान होता है। चन्द्रमा भी विरोधी हो तो पुष्य नक्षत्र में कार्य नही बिगड़ता। पुष्य नक्षत्र अंतर्गत किया गया कार्य सिद्ध होता है। पुष्य नक्षत्र फलम: न योगीयोगं न च लग्नीलग्नम न, तारिका चन्द्र बलं गुरुश्च । न योगिनी राहुर्नबलिष्ठकालः, एतानि विघ्नानि हरंति पुष्यः ।। अर्थात: योगिनी अच्छी न हो, चन्द्रमा अच्छा ना हो, तारा अच्छा ना हो,भद्रा, राहु ये भी अच्छे ना हो परन्तु पुष्य नक्षत्र उस दिन हो तो इतने दोषों को दूर करता है पुष्य योग। पुष्य नक्षत्र वैदिक मंत्र- ॐ बृहस्पते अतियदर्यौ अर्हाददुमद्विभाति क्रतमज्जनेषु । यददीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविण धेहि चित्रम।। तो पुष्य नक्षत्र और अमावस्या का लाभ ले दान, जप, पूजा पाठ करें, शुभ कार्यों मंत्र पाठ, नया काम आदि आज से शुरू करें। ग्रह जनित पीड़ा की शांति और ग्रहों के शुभ प्र...