Puja
नवरात्रमें कन्या पूजनके जो कम-से- कम दो वर्षकी हो चुकी हो कौमारी कहलाती है
तीन वर्षकी कन्याको 'त्रिमूर्ति' और
चार वर्षकी कन्याको 'कल्याणी' कहते हैं।
पाँच वर्षवालीको 'रोहिणी',
छः वर्षवालीको 'कालिका',
सात वर्षवालीको 'चण्डिका',
आठ वर्षवालीको 'शाम्भवी',
नौ वर्षवालीको 'दुर्गा' और
दस वर्षवालीको 'सुभद्रा' कहा गया है। इससे ऊपर अवस्थावाली कन्याकी पूजा नहीं करनी चाहिये। वह सभी कार्योंमें निन्द्य मानी जाती है ।
सूर्यसे आरोग्यकी,
अग्निसे श्रीकी,
शिवसे ज्ञानकी,
विष्णुसे मोक्षकी,
दुर्गा आदिसे रक्षाकी,
भैरव आदि से प्रकृति से पार पाने की
सरस्वती से विद्याके तत्त्वकी,
लक्ष्मीसे ऐश्वर्यकी वृद्धि,
पार्वतीसे स्वरकी, शची से मंगलवृद्धिकी, स्कन्दसे सन्तान-अधिकारी और गणेशसे सभी तत्वों की इच्छा (याचना) करें चाहिये।
भगवान् शंकर श्वेतार्कपुष्पसे, चन्द्रमा वस्त्रके तन्तुसे, भगवान् विष्णु स्मरणमात्रसे और साधुजन हाथ जोड़कर प्रसन्न हो जाते हैं।
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