श्री विष्णु दरिद्रनाशक स्तोत्र
॥ श्री विष्णु दरिद्रनाशक स्तोत्रम् ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
नमस्ते पुरुषोत्तमाय, नमस्ते प्रियतामाय, नमो नमः।
नमः शंखचक्रगदापद्मधराय, नमो विष्णवे।
त्वमेव सृष्टिकर्ता च पालकश्च हरः प्रभो।
त्वमेव सर्वभूतानां नाथो नित्यं जनार्दन॥
दुःखदारिद्र्यनाशाय सुखसमृद्धिदायक।
त्वं भवसागरपारं नय मां माधव गोविंद॥
अनाथोऽस्मि जगन्नाथ त्राहि मां शरणागतम्।
न मेऽस्ति गतिर्देव त्वं मे गतीः केवलम्॥
यस्य स्मरणमात्रेण दारिद्र्यं नैव तिष्ठति।
स गोविन्दो मम नाथो दामोदरः कृपालवः॥
नारायणो जगन्नाथो लक्ष्मीकान्तो जनार्दनः।
तुष्टो यदि भवेद्देवो दरिद्रता न शोभते॥
🔱 फलश्रुति (फल विधान)
जो व्यक्ति इस स्तोत्र का गुरुवार के दिन प्रातःकाल स्नान कर,
पीले वस्त्र धारण कर, श्रीविष्णु और लक्ष्मीजी के समक्ष दीपक जलाकर
श्रद्धा से पाठ करता है —
उसके जीवन से दरिद्रता, दुःख, ऋण, और अपयश दूर होकर
धन, सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वास होता है।
🙏 पाठ विधि
1. गुरुवार को प्रातः स्नान कर के विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें।
2. पीले पुष्प, चने की दाल, गुड़ का भोग अर्पण करें।
3. दीपक जलाकर यह स्तोत्र 3 बार पढ़ें।
4. अंत में "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जप करें।
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